मंगलायतन विश्वविद्यालय, एग्री मीट फाउंडेशन एवं रायल सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर द्वारा 21 दिवसीय एफडीपी कम ट्रेनिंग कार्यक्रम “अन्नदाता-2025” का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मंगलायतन विश्वविद्यालय की बायोटेक्नोलॉजी एवं लाइफ साइंसेज विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. सोनी सिंह ने “इंटीग्रेटिंग सस्टेनेबिलिटी एंड हायर एजुकेशन फॉर सोसायटल ट्रांसफॉर्मेशन” विषय पर अपना व्याख्यान दिया।
सोनी सिंह ने कहा कि सतत विकास आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और उच्च शिक्षा संस्थानों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उच्च शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान का प्रसार नहीं करते, बल्कि समाज को रूपांतरित करने की क्षमता रखते हैं। इसी कारण उच्च शिक्षा संस्थानों को पाठ्यक्रम नवाचार के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को सीधे शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में सतत विकास की बात कृषि के बिना अधूरी है। कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल खेती को उन्नत बनाने में मदद कर रहा है। सेंसर आधारित सिंचाई प्रणाली, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और डेटा एनालिटिक्स से कृषि उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
अपने व्याख्यान में उन्होंने नमो दीदी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने, कृषि क्षेत्र में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। सतत विकास की यात्रा केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी को इसमें सक्रिय भागीदार बनना होगा। क्योंकि जिस तेजी के साथ प्राकृतिक संसाधन का दोहन हो रहा है उससे हमारी आने वाली पीढ़ी पर पढ़ने वाले प्रभाव के बारे में भी सोचना पड़ेगा।